Osho Gurjiaef System

ओशो गुर्जिएफ़्फ़ सिस्टम ...
ओशो

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कई लोग पूछते है की , ओशो ध्यान शिबिर और ओशो गुर्जिएफ़्फ़ ध्यान शिबिर में क्या फर्क है...?...दोनों में ध्यान ही  होता है, किन्तु जो लोग मस्तिक से ज्यादा तेज है, उनके लिए गुर्जिएफ़्फ़ ध्यान जरुरी है...
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फिर लोग पूछते है की, हम ये ओशो ने बताया हुआ, ओशो गुर्जिएफ़्फ़ का ध्यान  क्यूँ करे...?
                     Osho On Topics
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लेकिन अगर हमारा माइंड , मस्तिक बहोत तेज (Critical) है...और या हम  स्ट्रेस , स्ट्रेइन, नकारत्मक विचारों , और डीप्रेस्सन से ग्रसित है, या हम ज्यादा विचारशील व्यक्ति है,...और अगर हम अपने माइंड से यानी मस्तिक से पूरा परिचित होना चाहते है, की वह कैसे कार्य करता है...ख़ास वक्त पे कैसा वर्तन करता है, अलग अलग  व्यक्ति के साथ क्यूँ बदल जाता है...मस्तक की शक्ति क्या है, और उसकी मर्यादा क्या है...कैसे उसका उपियोग कर सकते है...और कैसे विचार से मुक्त हो सके...और ये अविरत विचार क्यूँ आता है...कोंनसी कंडीसन में आता है...ये समजनेके लिए ओशो Gurdjieff सिस्टम समझना जरूरी है । 
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आज के मॉडर्न जीन्दगी में, में  कैसे शांत रह शकू...या कैसे मस्तक का उपियोग करके में , मेरी बहार की और अन्दर की (External and External Growth) प्रगति कर शकू...और कैसे लोगोके साथ, समाज में सुव्यवस्थित सम्बन्ध बननाए रखु...कैसे में कन्फुजन से बहार आ सकू...?
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ओशो कहेटे है कि जब तक हम ये michenism  ऑफ माइंड न समझ ले , वहा तक विचारो से मुक्त होना मुश्किल है...
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गुर्जिएफ़्फ़ ने यूरोप और अमेरिका में लोगो को ध्यान शिखाया, और वंहा के लोग ज्यादा माइंड ओरिएंटेड , मस्तिक से तेज और ज्यादा वैज्ञानिक समज के होने की वजह से , उसको  मस्तिक या दीमाग के ऊपर ज्यादा काम करना हुआ...
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और ओशो कहेते है , के यूरोप और अमेरिका की प्रगति , गुर्जिएफ़्फ़ की शिक्षा की वजह से हुई...
लेकीन , ओशो कहेते है...की, अगर हम सरल चित और सह्रदई व्यति है, तो हमारे लिए भक्ति मार्ग ठीक है...
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लेकिन अगर हम भक्त की व्याख्या समजे  तो पता चलता है, की वह बड़ा दुश्पुर मार्ग है...और अभी तक हमारे ओशो के संघ में , मुझे अभी तक एक भी व्यक्ति भक्त नहीं मिला हुआ है...
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ओशो उसे भक्त कहेते है, की जो अस्तित्व से राजी हो गया, और जब राजी हो गया तो उसकी सब शिकायते गिर गई, और जब सब शिकायते गिर गई तो वह निर-विचार या विचार मुक्त हो गया, क्यूंकि हर शिकायत के पीछे विचार होते है...
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क्या आप ने ऐसा भक्त को मिले हैं जो विचारो और शिकायतों से मुक्त हो गया हो ... अगर ऐसा कोई व्यक्ति , हो तो मेरा संपर्क करना ।
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विज्ञान, कम्पूटर, मोबाईल, मीडिया सब ने हमें मॉडर्न बना दिया है...और मॉडर्न व्यक्ति के लिए गुर्जिएफ़्फ़ बड़ा उपियोगी है...
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ओशो कहते हैं, की जब तक हम पुरा मिकैनिज्म ऑफ माइंड या पूरी रचना और भाषा , मस्तिक की न समझ ले, वहां तक विचारो से मुक्त होना मुश्किल है ।... और उसके लिए गुरजिएफ, बहुत उपियोगी साबित हो सकता है ....



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