Satya Bolo Priy bolo Osho

सत्य बोलो प्रिय बोलो
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पाखण्ड का मतलब यह होता है कि जो व्यक्तिखंड - खंड है वह पाखंडी है। पाखंड यानी खंड -खंड हो जाना। अखंड होने में पाखंड नहीं होता। अखंड का मतलब होता हैजैसा भीतर है वैसा बाहर है।
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मुझसे लोग नाराज इसलिए हैं कि मैं पाखण्ड में जरा भी भरोसा नहीं करता। जो मेरे भीतर है वही मैं कहता हूँ। जैसा है वैसा ही कहता हूंबुरा लगे बुरा लगे, भला लगे भला लगे। जो मेरे लिए सत्य है वही कहता  हूँ,  जो  परिणाम  हो। परिणाम  की  चिंता करके  जो  बोलता  है  वह  तो  सत्य बोल ही नहीं सकता। वह  तो  परिणाम  के  हिसाब से बोलेगा। वह तो दुकानदार है। वह तो यह देखता है कि लाभ किससे होगा, क्या कहूं  जिससे लाभ हो? वह अगरसत्य भी बोलेगा तो तभी बोलेगा जब लाभ होता हो। उसने तो सत्य को भी लाभ का ही साधन बना दिया है।
और सत्य किसी चीज का साधन नहीं है, परमसाध्य है। सब  कुछ  सत्य  पर समर्पित है, लेकिन सत्य किसी के लिए समर्पित नहीं .. सत्य ही परम धर्म है और सत्य ही भगवत्ता है। मगर यह अनुभव से हो।
 मैं कहूंगा सत्य हो जाओ। बोलना तो बड़ा आसान है, होने का सवाल है।
 सत्य बोलो, प्रिय बोलो।

 भीतर जहर रहे  और ऊपर मीठा बोलना, तो तुम दो हो गये---बोलने में कुछ होने में कुछ। और ध्यान रखना, करोगे तो तुम वही  जो तुम हो। बोलो तुम लाख कुछ और, होगा तो वही जो तुम हो।और जरा-सी खरोंच में निकल आएगा..........
             

 🐟 ज्यूँ मछली बिन नीर 🐟

🌹 ओशो प्रेम...... ✍🏻♥

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