Shraddha Karo - Osho

श्रद्धा कर सको - ओशो

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यदि तुम श्रद्धा कर सको, कुछ न कुछ हमेशा होता रहेगा और तुम्हारे विकास में मदद करेगा। तुम्हें उपलब्ध रहेगा। विशेष समय पर जिस किसी भी चीज की जरूरत होगी वह तुम्हें उपलब्ध करवाया जाएगा, उसके पहले नहीं। तुम्हें तब ही मिलेगा जब तुम्हें उसकी जरूरत होगी, और वहां एक क्षण की भी देरी नहीं होगी। जब तुम्हें जरूरत होगी तुम्हें मिल जाएगा, तत्काल, उसी समय! श्रद्धा की यह खूबसूरतीहै। धीरे-धीरे तुम यह सीखते हो कि कैसे अस्तित्व तुम्हें हर चीज उपलब्ध करवा रहाहै, कैसे अस्तित्व तुम्हारा ध्यान रखताहै। तुम ऐसे अस्तित्व में नहीं जी रहे हो जो उपेक्षा से भराहै। वह तुम्हारी उपेक्षा नहीं करता। तुम नाहक चिंता से भरे रहते हो; तुम्हें हर चीज उपलब्ध करवायी जातीहै। एक बार श्रद्धा की दक्षता तुम सीख लेते हो, सारी चिंताएं विदा हो जाती हैं। 

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